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शनिवार, 15 जुलाई 2017

चाणक्य के विचार Positive Ideas

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पहले हम राजा, अग्नि और स्त्री का अर्थ समझते हैं:

तो पहला question ये है कि “राजा” से उचित दूरी क्यों बनायीं जाए?

अब आते हैं दूसरी बात पर- अग्नि यानि risk या खतरे से उचित दूरी क्यों बनायीं जाए?

For example: करना एक रिस्क है पर हम इसे किस तरह स्टार्ट करते करते हैं बताता है कि ये कितना बड़ा रिस्क है। यदि आप एक ही बार इधर-उधर से पैसा जुटा कर बिना किसी experience के बहुत बड़ा बिजनेस शुरू करते हैं तो ये बहुत जोखिम भरा काम है और चाणक्य इसकी इजाज़त नहीं देंगे, लेकिन आप अपने पैसे बचा कर, अनभव लेकर कोई काम शुरू करते हैं तो निश्चित ही चाणक्य से इसकी अनुमति मिल जायेगी।
“स्त्री” को भोग-विलास की वस्तु से compare करना offending लगता है, पर यहाँ हमें चाणक्य के समय को ध्यान में रखना चाहिए, जब सचमुच स्त्रियों की स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी और उन्हें इस तरह से भी देखा जाता था। खैर, अगर हम आज-कल की बात करें तो बहुत से लोग चादर से अधिक पैर फैला कर जीते हैं, वे एक luxurious life की चाह में अपनी कमाई से अधिक खर्च करने की आदत डाल लेते हैं। Credit Card से शौपिंग करना, EMI पे चीजें खरीदना उनकी ज़रूरत बन जाती है।
* संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है, संतोष जैसा कोई सुख नहीं है, लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है, और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है.

























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