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सोमवार, 8 जुलाई 2019

सावन में महादेव की कृपा, श्रावण मास के Upay , Savan Me Shiv Pooja




ॐ नमः शिवायः
जानिए शिवलिंग पर क्या
चढ़ाने से क्या फल मिलता है...
★ शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है |
★ शिवलिंग पर दही अर्पित करने से हमें जीवन में हर्ष और उल्लास की प्राप्ति होती है ।
★ शिवलिंग पर शहद चडाने से रूप और सौंदर्य प्राप्त होता है , वाणी में मिठास रहती है, समाज में लोकप्रियता बढ़ती है ।
★ शिवलिंग पर घी चढ़ाने से हमें तेज की प्राप्ति होती है।
★ शिवलिंग पर शकर चढ़ाने से सुख - समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
★ शिवलिंग पर ईत्र चढ़ाने से धर्म की प्राप्ति होती हैं।
★ शिवलिंग पर सुगंधित तेल चढ़ाने से धन धान्य की वृद्धि होती है, जीवन में सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है ।
★ शिवलिंग पर चंदन चढ़ाने से समाज में यश और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
★ शिवलिंग पर केशर अर्पित करने से दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है , विवाह में आने वाली समस्त अड़चने दूर होती है, मनचाहा जीवन साथी प्राप्त होता है विवाह के योग शीघ्र बनते है ।
★ शिवलिंग पर आँवला अथवा आँवले का ऱस चढ़ाने से दीर्घ आयु प्राप्त होती है ।
★ शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से समस्त पारिवारिक सुखो की प्राप्ति होती है , परिवार के सदस्यों के मध्य में प्रेम बना रहता है ।
★ शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाने से वंश वृद्धि होती है, योग्य संतान की प्राप्ति होती है, संतान आज्ञाकारी होती है ।
★ शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से धन और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
★ शिवलिंग पर तिल चढ़ाने से पापों समस्त रोगो का नाश होता है।
        
★ शिवलिंग पर जौ अर्पित करने से सांसारिक सुखो की प्राप्ति होती है ।
★ भगवान भोलेनाथ की बेलपत्र से पूजा करने से सभी संकट दूर होते है ।
नोट: इन सभी चीजों की थोडी मात्रा ही चढ़ाये बाकि किसी जरुरतमंद को दान कर दे ।।
★ शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाने से वंश वृद्धि होती है, योग्य संतान की प्राप्ति होती है, संतान आज्ञाकारी होती है ।
★ शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से धन और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
★ शिवलिंग पर तिल चढ़ाने से पापों समस्त रोगो का नाश होता है।
        
★ शिवलिंग पर जौ अर्पित करने से सांसारिक सुखो की प्राप्ति होती है ।
★ भगवान भोलेनाथ की बेलपत्र से पूजा करने से सभी संकट दूर होते है ।
★ नोट: इन सभी चीजों की थोडी मात्रा ही चढ़ाये बाकि किसी जरुरतमंद को दान कर दे ।।
श्रावण  मास के प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर कुछ विशेष वास्तु अर्पित की जाती है जिसे शिवामुट्ठी कहते है।

1. प्रथम सोमवार को कच्चे चावल एक मुट्ठी,

2. दूसरे सोमवार को सफेद तिल् एक मुट्ठी,

3. तीसरे सोमवार को खड़े मूँग एक मुट्ठी,

4. चौथे सोमवार को जौ एक मुट्ठी और

5. यदि जिस मॉस में पांच सोमवार हो तो पांचवें सोमवार को सतुआ चढ़ाने जाते हैं। 

यदि पांच सोमवार  न हो तो आखरी सोमवार को दो मुट्ठी भोग अर्पित करते है।

माना जाता है कि श्रावण मास में शिव की पूजा करने से सारे कष्ट खत्म हो जाते हैं। महादेव शिव सर्व समर्थ हैं। वे मनुष्य के समस्त पापों का क्षय करके मुक्ति दिलाते हैं। इनकी पूजा से ग्रह बाधा भी दूर होती है।

1. *सूर्य* से संबंधित बाधा है, तो विधिवत या पंचोपचार के बाद लाल { बैगनी } आक के पुष्प एवं पत्तों से शिव की पूजा करनी चाहिए।

2. *चंद्रमा* से परेशान हैं, तो प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर गाय का दूध अर्पित करें। साथ ही सोमवार का व्रत भी करें।

3. *मंगल* से संबंधित बाधाओं के निवारण के लिए गिलोय की जड़ी-बूटी के रस से शिव का अभिषेक करना लाभप्रद रहेगा।

4. *बुध* से संबंधित परेशानी दूर करने के लिए विधारा की जड़ी के रस से शिव का अभिषेक करना ठीक रहेगा।

5. *बृहस्पति* से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए प्रत्येक बृहस्पतिवार को हल्दी मिश्रित दूध शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए।

6. *शुक्र* ग्रह को अनुकूल बनाना चाहते हैं, तो पंचामृत एवं घृत से शिवलिंग का अभिषेक करें।

7. *शनि* से संबंधित बाधाओं के निवारण के लिए गन्ने के रस एवं छाछ से शिवलिंग का अभिषेक करें।

8-9. *राहु-केतु* से मुक्ति के लिए कुश और दूर्वा को जल में मिलाकर शिव का अभिषेक करने से लाभ होगा।

शास्त्रों में मनोरथ पूर्ति व संकट मुक्ति के लिए अलग-अलग तरह की धारा से शिव का अभिषेक करना शुभ बताया गया है। 

अलग-अलग धाराओं से शिव अभिषेक का फल- जब किसी का मन बेचैन हो, निराशा से भरा हो, परिवार में कलह हो रहा हो, अनचाहे दु:ख और कष्ट मिल रहे हो तब शिव लिंग पर दूध की धारा चढ़ाना सबसे अच्छा उपाय है। 

इसमें भी शिव मंत्रों का उच्चारण करते रहना चाहिए।

1. *वंश की वृद्धि के लिए* शिवलिंग पर शिव सहस्त्रनाम बोलकर घी की धारा अर्पित करें।

2. शिव पर जलधारा से अभिषेक *मन की शांति के लिए* श्रेष्ठ मानी गई है।

3. *भौतिक सुखों को पाने के लिए* इत्र की धारा से शिवलिंग का अभिषेक करें।

4. *बीमारियों से छुटकारे के लिए* शहद की धारा से शिव पूजा करें।

5. गन्ने के रस की धारा से अभिषेक करने पर हर *सुख और आनंद मिलता है*।

6. सभी धाराओं से श्रेष्ठ है गंगाजल की धारा। शिव को गंगाधर कहा जाता है। शिव को गंगा की धार बहुत प्रिय है। गंगा जल से शिव अभिषेक करने पर *चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है।* इससे अभिषेक करते समय महामृत्युंजय मन्त्र जरुर बोलना चाहिए।

कार्य सिद्धि के लिए:--

1. हर ‍इच्छा पूर्ति के लिए हैं अलग शिवलिंग
पार्थिव शिवलिंग  हर कार्य सिद्धि के लिए।

2. गुड़ के शिवलिंग  प्रेम पाने के लिए।

3. भस्म से बने शिवलिंग सर्वसुख की प्राप्ति के लिए।

4. जौ या चावल या आटे के शिवलिंग  दाम्पत्य सुख, संतान प्राप्ति के लिए।

5. दही से बने शिवलिंग ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए।

6. पीतल, कांसी के शिवलिंग मोक्ष प्राप्ति के लिए।

7. सीसा इत्यादि के शिवलिंग शत्रु संहार के लिए।

8. पारे के शिवलिंग अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष के लिए।

पूजन में रखे इन बातों का ध्यान:--

1. सावन के महीने में शिवलिंग की करें | शिवलिंग जहां स्थापित हो पूरव् दिशा की ओर मुख करके ही बैठें।

2. शिवलिंग के दक्षिण दिशा में  बैठकर पूजन न  करें।

ये होता है अभिषेक का फल:--

1. दूध से अभिषेक करने पर परिवार में कलह, मानसिक पीड़ा में शांति मिलती है।

2. घी से अभिषेक करने पर वंशवृद्धि होती है।

3. इत्र से अभिषेक करने पर भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।

4. जलधारा से अभिषेक करने पर मानसिक शान्ति मिलती है।

5. शहद से अभिषेक करने पर परिवार में बीमारियों का अधिक प्रकोप नहीं रहता।

6. गन्ने के रस की धारा डालते हुये अभिषेक करने से आर्थिक समृद्धि व परिवार में सुखद माहौल बना रहता है।

7. गंगा जल से अभिषेक करने पर चारो पुरूषार्थ की प्राप्ति होती है। 

8. अभिषेक करते समय महामृत्युंजय का जाप करने से फल की प्राप्ति कई गुना अधिक हो जाती है। 

9. सरसों के तेल से अभिषेक करने से शत्रुओं का शमन होता।

ये भी मिलते हैं फल:--

9. बिल्वपत्र चढ़ाने से जन्मान्तर के पापों व रोग से मुक्ति मिलती है।

10. कमल पुष्प चढ़ाने से शान्ति व धन की प्राप्ति होती है।

11. कुशा चढ़ाने से मुक्ति की प्राप्ति होती है।

12. दूर्वा चढ़ाने से आयु में वृद्धि होती है।

13. धतूरा अर्पित करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति व पुत्र का सुख मिलता है।

14. कनेर का पुष्प चढ़ाने से परिवार में कलह व रोग से निवृत्ति मिलती हैं।

15. शमी पत्र चढ़ाने से पापों का नाश होता, शत्रुओं का शमन व भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है।
हर हर महादेव

---- ऊँ उमामहेश्वराभ्यां  नमः
भगवान शिव के 108 नाम 


1.शिव – कल्याण स्वरूप
2.महेश्वर – माया के अधीश्वर3.शम्भू – आनंद स्वरूप वाले
4.पिनाकी – पिनाक धनुष धारण करने वाले
5.शशिशेखर – चंद्रमा धारण करने वाले
6.वामदेव – अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले
7.विरूपाक्ष – विचित्र अथवा तीन आंख वाले
8.कपर्दी – जटा धारण करने वाले
9.नीललोहित – नीले और लाल रंग वाले
10.शंकर – सबका कल्याण करने वाले
11.शूलपाणी – हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले
12.खटवांगी- खटिया का एक पाया रखने वाले
13.विष्णुवल्लभ – भगवान विष्णु के अति प्रिय
14.शिपिविष्ट – सितुहा में प्रवेश करने वाले
15.अंबिकानाथ- देवी भगवती के पति
16.श्रीकण्ठ – सुंदर कण्ठ वाले
17.भक्तवत्सल – भक्तों को अत्यंत स्नेह करने वाले
18.भव – संसार के रूप में प्रकट होने वाले
19.शर्व – कष्टों को नष्ट करने वाले
20.त्रिलोकेश- तीनों लोकों के स्वामी
21.शितिकण्ठ – सफेद कण्ठ वाले
22.शिवाप्रिय – पार्वती के प्रिय
23.उग्र – अत्यंत उग्र रूप वाले
24.कपाली – कपाल धारण करने वाले
25.कामारी – कामदेव के शत्रु, अंधकार को हरने वाले
26.सुरसूदन – अंधक दैत्य को मारने वाले
27.गंगाधर – गंगा को जटाओं में धारण करने वाले
28.ललाटाक्ष – माथे पर आंख धारण किए हुए
29.महाकाल – कालों के भी काल
30.कृपानिधि – करुणा की खान
31.भीम – भयंकर या रुद्र रूप वाले
32.परशुहस्त – हाथ में फरसा धारण करने वाले
33.मृगपाणी – हाथ में हिरण धारण करने वाले
34.जटाधर – जटा रखने वाले
35.कैलाशवासी – कैलाश पर निवास करने वाले
36.कवची – कवच धारण करने वाले
37.कठोर – अत्यंत मजबूत देह वाले
38.त्रिपुरांतक – त्रिपुरासुर का विनाश करने वाले
39.वृषांक – बैल-चिह्न की ध्वजा वाले
40.वृषभारूढ़ – बैल पर सवार होने वाले
41.भस्मोद्धूलितविग्रह – भस्म लगाने वाले
42.सामप्रिय – सामगान से प्रेम करने वाले
43.स्वरमयी – सातों स्वरों में निवास करने वाले
44.त्रयीमूर्ति – वेद रूपी विग्रह करने वाले
45.अनीश्वर – जो स्वयं ही सबके स्वामी है
46.सर्वज्ञ – सब कुछ जानने वाले
47.परमात्मा – सब आत्माओं में सर्वोच्च
48.सोमसूर्याग्निलोचन – चंद्र, सूर्य और अग्निरूपी आंख वाले
49.हवि – आहुति रूपी द्रव्य वाले
50.यज्ञमय – यज्ञ स्वरूप वाले
51.सोम – उमा के सहित रूप वाले
52.पंचवक्त्र – पांच मुख वाले
53.सदाशिव – नित्य कल्याण रूप वाले
54.विश्वेश्वर- विश्व के ईश्वर
55.वीरभद्र – वीर तथा शांत स्वरूप वाले
56.गणनाथ – गणों के स्वामी
57.प्रजापति – प्रजा का पालन- पोषण करने वाले
58.हिरण्यरेता – स्वर्ण तेज वाले
59.दुर्धुर्ष – किसी से न हारने वाले
60.गिरीश – पर्वतों के स्वामी
61.गिरिश्वर – कैलाश पर्वत पर रहने वाले
62.अनघ – पापरहित या पुण्य आत्मा
63.भुजंगभूषण – सांपों व नागों के आभूषण धारण करने वाले
64.भर्ग – पापों का नाश करने वाले
65.गिरिधन्वा – मेरू पर्वत को धनुष बनाने वाले
66.गिरिप्रिय – पर्वत को प्रेम करने वाले
67.कृत्तिवासा – गजचर्म पहनने वाले
68.पुराराति – पुरों का नाश करने वाले
69.भगवान् – सर्वसमर्थ ऐश्वर्य संपन्न
70.प्रमथाधिप – प्रथम गणों के अधिपति
71.मृत्युंजय – मृत्यु को जीतने वाले
72.सूक्ष्मतनु – सूक्ष्म शरीर वाले
73.जगद्व्यापी- जगत में व्याप्त होकर रहने वाले
74.जगद्गुरू – जगत के गुरु
75.व्योमकेश – आकाश रूपी बाल वाले
76.महासेनजनक – कार्तिकेय के पिता
77.चारुविक्रम – सुन्दर पराक्रम वाले
78.रूद्र – उग्र रूप वाले
79.भूतपति – भूतप्रेत व पंचभूतों के स्वामी
80.स्थाणु – स्पंदन रहित कूटस्थ रूप वाले
81.अहिर्बुध्न्य – कुण्डलिनी- धारण करने वाले
82.दिगम्बर – नग्न, आकाश रूपी वस्त्र वाले
83.अष्टमूर्ति – आठ रूप वाले
84.अनेकात्मा – अनेक आत्मा वाले
85.सात्त्विक- सत्व गुण वाले
86.शुद्धविग्रह – दिव्यमूर्ति वाले
87.शाश्वत – नित्य रहने वाले
88.खण्डपरशु – टूटा हुआ फरसा धारण करने वाले
89.अज – जन्म रहित
90.पाशविमोचन – बंधन से छुड़ाने वाले
91.मृड – सुखस्वरूप वाले
92.पशुपति – पशुओं के स्वामी
93.देव – स्वयं प्रकाश रूप
94.महादेव – देवों के देव
95.अव्यय – खर्च होने पर भी न घटने वाले
96.हरि – विष्णु समरूपी
97.पूषदन्तभित् – पूषा के दांत उखाड़ने वाले
98.अव्यग्र – व्यथित न होने वाले
99.दक्षाध्वरहर – दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले
100.हर – पापों को हरने वाले
101.भगनेत्रभिद् - भग देवता की आंख फोड़ने वाले
102.अव्यक्त - इंद्रियों के सामने प्रकट न होने वाले
103.सहस्राक्ष - अनंत आँख वाले
104.सहस्रपाद - अनंत पैर वाले
105.अपवर्गप्रद - मोक्ष देने वाले
106.अनंत - देशकाल वस्तु रूपी परिच्छेद से रहित
107.तारक - तारने वाले
108.परमेश्वर - प्रथम ईश्वर




शिवजी की आरती 

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं |
सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव भवानी सहितं नमामि ॥


जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा |
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा......
एकानन चतुरानन पंचांनन राजे |
हंसासंन ,गरुड़ासन ,वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा......
दो भुज चारु चतुर्भज दस भुज अति सोहें |
तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥
ॐ जय शिव ओंकारा......
अक्षमाला ,बनमाला ,रुण्ड़मालाधारी |
चंदन , मृदमग सोहें, भाले शशिधारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा......
श्वेताम्बर,पीताम्बर, बाघाम्बर अंगें
सनकादिक, ब्रम्हादिक ,भूतादिक संगें
ॐ जय शिव ओंकारा......
कर के मध्य कमड़ंल चक्र ,त्रिशूल धरता |
जगकर्ता, जगभर्ता, जगसंहारकर्ता ॥
ॐ जय शिव ओंकारा......
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका |
प्रवणाक्षर मध्यें ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव ओंकारा......
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रम्हचारी |
नित उठी भोग लगावत महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा......
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावें |
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावें ॥
ॐ जय शिव ओंकारा.....
जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा|
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा......


मृतसंजीवनि रक्षा मंत्र 

ऊॅ हौं जूं सः। ऊॅ भूः भुवः स्वः ऊॅ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उव्र्वारूकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्  मधुकर / किरण / एवं शिवंशीउर्फ बाटू को रक्षयरक्षय - पालय-पालय ऊॅ स्वः भुवः भूः ऊॅ। ऊॅ सः जूं हौं। ह्रीं ह्रीं वं वं ऐं ऐं मृतसंजीवनि विद्ये मृतमुत्थापयोत्थापय क्रीं ह्रीं ह्रींवं स्वाहा।



मृतसंजीवनि रक्षा यंत्र



अमोघ शिव कवच प्रयोग
 इसके शुद्ध सत्य अनुष्ठान से भयंकर से भयंकर विपत्ति से छुटकारा मिल जाता है और भगवान आशुतोष की कृपा हो जाती है |

अथ विनियोग:
अस्य श्री शिव कवच स्त्रोत्र मंत्रस्य ब्रह्मा ऋषि:, अनुष्टुप छंद:, श्री सदाशिव रुद्रो देवता, ह्रीं शक्ति:, रं कीलकम, श्रीं ह्रीं क्लीं बीजं, श्री सदाशिव प्रीत्यर्थे शिवकवच स्त्रोत्र जपे विनियोग: |

अथ न्यास: ( पहले सभी मंत्रो को बोलकर क्रम से करन्यास करे | तदुपरांत इन्ही मंत्रो से अंगन्यास करे| )

करन्यास
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
ह्रां सर्वशक्तिधाम्ने इशानात्मने अन्गुष्ठाभ्याम नम: |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
नं रिं नित्यतृप्तिधाम्ने तत्पुरुषातमने तर्जनीभ्याम नम: |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
मं रूं अनादिशक्तिधाम्ने अधोरात्मने मध्यमाभ्याम नम:|
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
शिं रैं स्वतंत्रशक्तिधाम्ने वामदेवात्मने अनामिकाभ्याम नम: |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
वां रौं अलुप्तशक्तिधाम्ने सद्योजातात्मने कनिष्ठिकाभ्याम नम: |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
यं र: अनादिशक्तिधाम्ने सर्वात्मने करतल करपृष्ठाभ्याम नम: |


अंगन्यास
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
ह्रां सर्वशक्तिधाम्ने इशानात्मने हृदयाय नम: |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
नं रिं नित्यतृप्तिधाम्ने तत्पुरुषातमने शिरसे स्वाहा |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
मं रूं अनादिशक्तिधाम्ने अधोरात्मने शिखायै वषट |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
शिं रैं स्वतंत्रशक्तिधाम्ने वामदेवात्मने नेत्रत्रयाय वौषट |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
वां रौं अलुप्तशक्तिधाम्ने सद्योजातात्मने कवचाय हुम |
ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ
यं र: अनादिशक्तिधाम्ने सर्वात्मने अस्त्राय फट |

अथ दिग्बन्धन:

ॐ भूर्भुव: स्व: |

ध्यानम
कर्पुरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम |
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ||

श्री शिव कवचम

ॐ नमो भगवते सदाशिवाय, सकलतत्वात्मकाय, सर्वमंत्रस्वरूपाय, सर्वमंत्राधिष्ठिताय, सर्वतंत्रस्वरूपाय, सर्वतत्वविदूराय, ब्रह्मरुद्रावतारिणे, नीलकंठाय, पार्वतीमनोहरप्रियाय, सोमसुर्याग्नीलोचनाय, भस्मोधूलितविग्रहाय, महामणिमुकुटधारणाय, माणिक्यभूषणाय, सृष्टिस्थितिप्रलयकालरौद्रावताराय, दक्षाध्वरध्वन्सकाय, महाकालभेदनाय, मुलाधारैकनिलयाय, तत्वातीताय, गंगाधराय, सर्वदेवाधिदेवाय, षडाश्रयाय, वेदांतसाराय, त्रिवर्गसाधनाया नेक्कोटीब्रहमांडनायकायानन्त्वासुकीतक्षककर्कोटकशंखकुलिकपद्ममहापद्मेत्यष्टनागकुलभूषणाय, प्रणवरूपाय, चिदाकाशायाकाशदिकस्वरूपाय, ग्रहनक्षत्रमालिने, सकलायकलंकरहिताय, सकललोकैककर्त्रे, सकललोकैकसंहर्त्रे, सकललोकैकगुरवे, सकललोकैकभर्त्रे, सकललोकैकसाक्षीणे, सकलनिगमगुह्याय, सकलवेदांतपारगाय, सकललोकैकवरप्रदाय, सकललोकैकशंकराय, शशांकशेखराय, शाश्वतनिजावासाय, निराभासाय, निरामयाय, निर्मलाय, निर्लोभाय, निर्मोहाय, निर्मदाय, निश्चिन्ताय, निर्हंकाराय, निराकुलाय, निष्कलन्काय, निर्गुणाय, निष्कामाय, निरुप्लवाय, नीवद्याय, निरन्तराय, निष्कारणाय, निरातंकाय, निष्प्रपंचाय, नि:संगाय, निर्द्वंदाय, निराधाराय, नीरोगाय, निष्क्रोधाय, निर्गमाय, निष्पापाय, निर्भयाय, निर्विकल्पाय, निर्भेदाय, निष्क्रियाय, निस्तुल्याय, निस्संशयाय, निरंजनाय, निरुपम विभवाय, नित्यशुद्धबुद्धपरिपूर्णसच्चिदानंदाद्वयाय, परमशांतस्वरूपाय, तेजोरूपाय, तेजोमयाय,
जयजय रूद्रमहारौद्र, भद्रावतार, महाभैरव, कालभैरव, कल्पान्तभैरव, कपाल मालाधर, खट्वांगखंगचर्मपाशांकुशडमरूकरत्रिशूल चापबाणगदाशक्तिभिन्दिपालतोमरमुसलमुदगरप्रासपरिघभुशुण्डीशतघ्नीचक्रद्यायुद्धभीषणकर, सहस्रमुख, दंष्ट्रा कराल वदन, विक्टाट हास विस्फारित ब्रहमांड मंडल, नागेन्द्र कुंडल, नागेन्द्रहार, नागेन्द्र वलय, नागेन्द्र चर्मधर, मृत्युंजय, त्रयम्बक, त्रिपुरान्तक, विश्वरूप, विरूपाक्ष, विश्वेश्वर, वृषवाहन, विश्वतोमुख सर्वतो रक्ष रक्ष माम |
ज्वल ज्वल महामृत्युअपमृत्युभयं नाशय नाशय चौर भयंमुत्सारयोत्सारय: विष सर्प भयं शमय शमय: चौरान मारय मारय: मम शत्रून उच्चाटयोच्चाटय: त्रिशुलेंन विदारय विदारय: कुठारेण भिन्धि भिन्धि: खंगेन छिन्धि छिन्धि: खट्वांगेन विपोथय विपोथय: मूसलेन निष्पेषय निष्पेषय: बाणे: संताडय संताडय: रक्षांसि भीषय भीषयाशेष्भूतानी विद्रावय विद्रावय: कुष्मांडवेतालमारीचब्रहमराक्षसगणान संत्रासय संत्रासय: माम अभयं कुरु कुरु: वित्रस्तं माम अश्वास्याश्वसय: नरक भयान माम उद्धरौद्धर: संजीवय संजीवय: क्षुत्रिडभ्यां माम आप्यापय आप्यापय: दु:खातुरं माम आनंदय आनंदय : शिव कवचे न माम आच्छादय आच्छादय: मृत्युंजय! त्रयम्बक! सदाशिव!!! नमस्ते नमस्ते ||




*सावन में इन 7 चीजों को घर में रखने भर से बरसती है महादेव की कृपा*

सावन के समय में कोई भी सच्चे मन और भक्ति के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ति होती है। आज हम जानेंगे राशि अनुसार किस प्रकार भगवान शिव की आराधना करना हमारे लिए सबसे ज्यादा फलदाई होगा। पुराणों के अनुसार सावन में भोले शंकर की पूजा, अभिषेक, शिव स्तुति, मंत्र जाप का खास महत्व है। खासकर सोमवारी के दिन महादेव की आराधना से शिव और शक्ति दोनों प्रसन्न होते हैं।इनकी कृपा से दैविक, दैहिक और भौतिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। निर्धन को धन और नि:संतान को संतान की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। बाबा भोले की पूजा से भाग्य पलट सकता है। कहते हैं कि सावन में यदि कुछ चीजों को घर में रखा जाए तो किस्म त भी बदल सकती है-
*गंगा जल:* गंगा जल की पवित्रता एवं महत्त्व तो हर हिन्दू समझता है| इसीलिए किसी भी धार्मिक कार्य में या किसी भी वस्तु की शुद्धि के लिए गंगा जल का प्रयोग किया जाता है| भगवन शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में स्थान दिया था, जिसके कारण घर के किचन में गंगा जल रखने से घर में तरक्की ओर सफलता बानी रहती है|
*भस्म:* भस्म शिव जी की सबसे ज्यादा प्रिय वस्तुओं में से एक है ये सभी जानते है| शिव जी का भस्म से श्रृंगार किया जाता है महाकाल की भस्म आरती तो विश्व प्रसिद्द है| इसलिए सावन के दौरान घर के मंदिर में शिव मूर्ति के साथ इसे जरूर रखना चाहिए |
*चांदी या ताम्बे का त्रिशूल:* शिव जी के प्रमुख शास्त्रों में शामिल है त्रिशूल| हमने हमेशा शिव जी की प्रतिमा या चित्रों में शिव जी के साथ त्रिशूल देखा है क्योंतकि वो उन्हें अत्यन्त प्रिय है| इसलिए घर के हाल में ताम्बे या चांदी के त्रिशूल की स्थापना करने से घर पर किसी तरह का नकारात्मक प्रभाव असर नहीं कर पाता है|
*रुद्राक्ष:* रुद्राक्ष का हिन्दू धर्म में बहुत महत्त्व है| हर एक साधु को एवं खास कर शिव जी के भक्तो को रुद्राक्ष धारण किये हुए देखा जा सकता है| रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसू से हुए है ऐसा माना है| इसलिए शिव जी के सभी भक्त हमेशा ही रुद्राक्ष धारण करते है एवं उनकी पूजा करते है| इसलिए अगर रुद्राक्ष को घर के मुखिया के कमरे में रख जाये तो इस से ढेर सरे लाभो की प्राप्ति होती है|
*पानी से भरा ताम्बे का लोटा:* घर के जिस हिस्से में सदस्य सबसे ज्यादा समय बीतते हो, वहां ताम्बे के लोटे में पनि भरकर रखने से घर में हमेशा प्रेम और विश्वास बन रहता है|
*डमरू:* शिव जी को डमरू भी उनके त्रिशूल के जैसे ही प्रिय है वो हमेशा उनके साथ रहती है| घर में बच्चों के कमरे में डमरू रखने से बच्चों पर किसी तरह की नेगेटिव एनर्जी प्रभाव नहीं दाल पायेगी एवं उन्हें हर कार्य में सफलता प्राप्त होगी|
*चांदी या ताम्बे के नंदी जी:* नंदी जी को शिव जी की सवारी माना जाता है एवं हमे कोई भी बात अगर शिव जी तक पहुंचानी हो तो नंदी जी इसके लिए उत्तम होते है| जिस तरह घर में चांदी की गाय रखने का महत्त्व है, उसी तरह चांदी के नंदी को घर की उस अलमारी या तिजोरी में रखना चाहिए, जिसमे ज्वेलरी रखी जाती हो|



                                शिव सहस्त्रनाम                         

ॐ स्थिराय नमः॥ॐ स्थाणवे नमः॥ॐ प्रभवे नमः॥ॐ भीमाय नमः॥ॐ 
प्रवराय नमः॥ॐ वरदाय नमः॥ॐ वराय नमः॥ॐ सर्वात्मन नमः॥ ॐ सर्वविख्याताय नमः॥ ॐ सर्वस्मै नमः॥ ॐ सर्वकाराय नमः॥ॐ भवाय नमः॥ॐ जटिने नमः॥ॐ चर्मिणे नमः॥ ॐ शिखण्डिने नमः॥ ॐ सर्वांङ्गाय नमः॥ ॐ सर्वभावाय नमः॥ ॐ हराय नमः॥ ॐ हरिणाक्षाय नमः॥ ॐ सर्वभूतहराय नमः॥ ॐ प्रभवे नमः॥ ॐ प्रवृत्तये नमः॥ ॐ निवृत्तये नमः॥ ॐ नियताय नमः॥ ॐ शाश्वताय नमः॥ ॐ ध्रुवाय नमः॥ ॐ श्मशानवासिने नमः॥ ॐ भगवते नमः॥ ॐ खेचराय नमः॥ ॐ गोचराय नमः॥ ॐ अर्दनाय नमः॥ ॐ अभिवाद्याय नमः॥ ॐ महाकर्मणे नमः॥ ॐ तपस्विने नमः॥ ॐ भूतभावनाय नमः॥ ॐ उन्मत्तवेषप्रच्छन्नाय नमः॥ ॐ सर्वलोकप्रजापतये नमः॥ ॐ महारूपाय नमः॥ ॐ महाकायाय नमः॥ ॐ वृषरूपाय नमः॥ ॐ महायशसे नमः॥ ॐ महात्मने नमः॥ ॐ सर्वभूतात्मने नमः॥ ॐ विश्वरूपाय नमः॥ ॐ महाहनवे नमः॥ ॐ लोकपालाय नमः॥ ॐ अंतर्हितात्मने नमः॥ ॐ प्रसादाय नमः॥ ॐ हयगर्दभाय नमः॥ ॐ पवित्राय नमः॥ (50)

ॐ महते नमः॥ ॐ नियमाय नमः॥ ॐ नियमाश्रिताय नमः॥ ॐ सर्वकर्मणे नमः॥ ॐ स्वयंभूताय नमः॥ ॐ आदये नमः॥ ॐ आदिकराय नमः॥ ॐ निधये नमः॥ ॐ सहस्राक्षाय नमः॥ ॐ विशालाक्षाय नमः॥ ॐ सोमाय नमः॥ ॐ नक्षत्रसाधकाय नमः॥ ॐ चंद्राय नमः॥ ॐ सूर्याय नमः॥ ॐ शनये नमः॥ ॐ केतवे नमः॥ ॐ ग्रहाय नमः॥ ॐ ग्रहपतये नमः॥ ॐ वराय नमः॥ ॐ अत्रये नमः॥ ॐ अत्र्यानमस्कर्त्रे नमः॥ ॐ मृगबाणार्पणाय नमः॥ ॐ अनघाय नमः॥ ॐ महातपसे नमः॥ ॐ घोरतपसे नमः॥ ॐ अदीनाय नमः॥ ॐ दीनसाधककराय नमः॥ ॐ संवत्सरकराय नमः॥ ॐ मंत्राय नमः॥ ॐ प्रमाणाय नमः॥ ॐ परमन्तपाय नमः॥ ॐ योगिने नमः॥ ॐ योज्याय नमः॥ ॐ महाबीजाय नमः॥ ॐ महारेतसे नमः॥ ॐ महाबलाय नमः॥ ॐ सुवर्णरेतसे नमः॥ ॐ सर्वज्ञाय नमः॥ ॐ सुबीजाय नमः॥ ॐ बीजवाहनाय नमः॥ ॐ दशबाहवे नमः॥ ॐ अनिमिषाय नमः॥ ॐ नीलकण्ठाय नमः॥ ॐ उमापतये नमः॥ ॐ विश्वरूपाय नमः॥ ॐ स्वयंश्रेष्ठाय नमः॥ ॐ बलवीराय नमः॥ ॐ अबलोगणाय नमः॥ ॐ गणकर्त्रे नमः॥ ॐ गणपतये नमः॥ (100)

ॐ दिग्वाससे नमः॥ ॐ कामाय नमः॥ ॐ मंत्रविदे नमः॥ ॐ परममन्त्राय नमः॥ ॐ सर्वभावकराय नमः॥ ॐ हराय नमः॥ ॐ कमण्डलुधराय नमः॥ ॐ धन्विते नमः॥ ॐ बाणहस्ताय नमः॥ ॐ कपालवते नमः॥ ॐ अशनिने नमः॥ ॐ शतघ्निने नमः॥ ॐ खड्गिने नमः॥ ॐ पट्टिशिने नमः॥ ॐ आयुधिने नमः॥ ॐ महते नमः॥ ॐ स्रुवहस्ताय नमः॥ ॐ सुरूपाय नमः॥ ॐ तेजसे नमः॥ ॐ तेजस्करनिधये नमः॥ ॐ उष्णीषिणे नमः॥ ॐ सुवक्त्राय नमः॥ ॐ उदग्राय नमः॥ ॐ विनताय नमः॥ ॐ दीर्घाय नमः॥ ॐ हरिकेशाय नमः॥ ॐ सुतीर्थाय नमः॥ ॐ कृष्णाय नमः॥ ॐ श्रृगालरूपाय नमः॥ ॐ सिद्धार्थाय नमः॥
ॐ मुण्डाय नमः॥ ॐ सर्वशुभंकराय नमः॥ ॐ अजाय नमः॥ ॐ बहुरूपाय नमः॥ ॐ गन्धधारिणे नमः॥ ॐ कपर्दिने नमः॥ ॐ उर्ध्वरेतसे नमः॥ ॐ उर्ध्वलिंगाय नमः॥ ॐ उर्ध्वशायिने नमः॥ ॐ नभस्थलाय नमः॥ ॐ त्रिजटाय नमः॥ ॐ चीरवाससे नमः॥ ॐ रूद्राय नमः॥ ॐ सेनापतये नमः॥ ॐ विभवे नमः॥ ॐ अहश्चराय नमः॥ ॐ नक्तंचराय नमः॥ ॐ तिग्ममन्यवे नमः॥ ॐ सुवर्चसाय नमः॥ ॐ गजघ्ने नमः॥ (150)
ॐ दैत्यघ्ने नमः॥ ॐ कालाय नमः॥ ॐ लोकधात्रे नमः॥ ॐ गुणाकराय नमः॥ ॐ सिंहसार्दूलरूपाय नमः॥ ॐ आर्द्रचर्माम्बराय नमः॥ ॐ कालयोगिने नमः॥ ॐ महानादाय नमः॥ ॐ सर्वकामाय नमः॥ ॐ चतुष्पथाय नमः॥ ॐ निशाचराय नमः॥ ॐ प्रेतचारिणे नमः॥ ॐ भूतचारिणे नमः॥ ॐ महेश्वराय नमः॥ ॐ बहुभूताय नमः॥ ॐ बहुधराय नमः॥ ॐ स्वर्भानवे नमः॥ ॐ अमिताय नमः॥ ॐ गतये नमः॥ ॐ नृत्यप्रियाय नमः॥ ॐ नृत्यनर्ताय नमः॥ ॐ नर्तकाय नमः॥ ॐ सर्वलालसाय नमः॥ ॐ घोराय नमः॥ ॐ महातपसे नमः॥ ॐ पाशाय नमः॥ ॐ नित्याय नमः॥ ॐ गिरिरूहाय नमः॥ ॐ नभसे नमः॥ ॐ सहस्रहस्ताय नमः॥ ॐ विजयाय नमः॥ ॐ व्यवसायाय नमः॥ ॐ अतन्द्रियाय नमः॥ ॐ अधर्षणाय नमः॥ ॐ धर्षणात्मने नमः॥ ॐ यज्ञघ्ने नमः॥ ॐ कामनाशकाय नमः॥ ॐ दक्षयागापहारिणे नमः॥ ॐ सुसहाय नमः॥ ॐ मध्यमाय नमः॥ ॐ तेजोपहारिणे नमः॥ ॐ बलघ्ने नमः॥ ॐ मुदिताय नमः॥ ॐ अर्थाय नमः॥ ॐ अजिताय नमः॥ ॐ अवराय नमः॥ ॐ गम्भीरघोषाय नमः॥ ॐ गम्भीराय नमः॥ ॐ गंभीरबलवाहनाय नमः॥ ॐ न्यग्रोधरूपाय नमः॥ (200)

ॐ न्यग्रोधाय नमः॥ ॐ वृक्षकर्णस्थितये नमः॥ ॐ विभवे नमः॥ ॐ सुतीक्ष्णदशनाय नमः॥ ॐ महाकायाय नमः॥ ॐ महाननाय नमः॥ ॐ विश्वकसेनाय नमः॥ ॐ हरये नमः॥ ॐ यज्ञाय नमः॥ ॐ संयुगापीडवाहनाय नमः॥ ॐ तीक्ष्णतापाय नमः॥ ॐ हर्यश्वाय नमः॥ ॐ सहायाय नमः॥ ॐ कर्मकालविदे नमः॥ ॐ विष्णुप्रसादिताय नमः॥ ॐ यज्ञाय नमः॥ ॐ समुद्राय नमः॥ ॐ वडमुखाय नमः॥ ॐ हुताशनसहायाय नमः॥ ॐ प्रशान्तात्मने नमः॥ ॐ हुताशनाय नमः॥ ॐ उग्रतेजसे नमः॥ ॐ महातेजसे नमः॥ ॐ जन्याय नमः॥ ॐ विजयकालविदे नमः॥ ॐ ज्योतिषामयनाय नमः॥ ॐ सिद्धये नमः॥ ॐ सर्वविग्रहाय नमः॥ ॐ शिखिने नमः॥ ॐ मुण्डिने नमः॥ ॐ जटिने नमः॥ ॐ ज्वालिने नमः॥ ॐ मूर्तिजाय नमः॥ ॐ मूर्ध्दगाय नमः॥ ॐ बलिने नमः॥ ॐ वेणविने नमः॥ ॐ पणविने नमः॥ ॐ तालिने नमः॥ ॐ खलिने नमः॥ ॐ कालकंटकाय नमः॥ ॐ नक्षत्रविग्रहमतये नमः॥ ॐ गुणबुद्धये नमः॥ ॐ लयाय नमः॥ ॐ अगमाय नमः॥ ॐ प्रजापतये नमः॥ ॐ विश्वबाहवे नमः॥ ॐ विभागाय नमः॥ ॐ सर्वगाय नमः॥ ॐ अमुखाय नमः॥ ॐ विमोचनाय नमः॥ (250)

ॐ सुसरणाय नमः॥ ॐ हिरण्यकवचोद्भाय नमः॥ ॐ मेढ्रजाय नमः॥ ॐ बलचारिणे नमः॥ ॐ महीचारिणे नमः॥ ॐ स्रुत्याय नमः॥ ॐ सर्वतूर्यनिनादिने नमः॥ ॐ सर्वतोद्यपरिग्रहाय नमः॥ ॐ व्यालरूपाय नमः॥ ॐ गुहावासिने नमः॥ ॐ गुहाय नमः॥ ॐ मालिने नमः॥ ॐ तरंगविदे नमः॥ ॐ त्रिदशाय नमः॥ ॐ त्रिकालधृगे नमः॥ ॐ कर्मसर्वबन्ध–विमोचनाय नमः॥ ॐ असुरेन्द्राणां बन्धनाय नमः॥ ॐ युधि शत्रुवानाशिने नमः॥ ॐ सांख्यप्रसादाय नमः॥ ॐ दुर्वाससे नमः॥ ॐ सर्वसाधुनिषेविताय नमः॥ ॐ प्रस्कन्दनाय नमः॥ ॐ विभागज्ञाय नमः॥ ॐ अतुल्याय नमः॥ ॐ यज्ञविभागविदे नमः॥ ॐ सर्वचारिणे नमः॥ ॐ सर्ववासाय नमः॥ ॐ दुर्वाससे नमः॥ ॐ वासवाय नमः॥ ॐ अमराय नमः॥ ॐ हैमाय नमः॥ ॐ हेमकराय नमः॥ ॐ अयज्ञसर्वधारिणे नमः॥ ॐ धरोत्तमाय नमः॥ ॐ लोहिताक्षाय नमः॥ ॐ महाक्षाय नमः॥ ॐ विजयाक्षाय नमः॥ ॐ विशारदाय नमः॥ ॐ संग्रहाय नमः॥ ॐ निग्रहाय नमः॥ ॐ कर्त्रे नमः॥ ॐ सर्पचीरनिवसनाय नमः॥ ॐ मुख्याय नमः॥ ॐ अमुख्याय नमः॥ ॐ देहाय नमः॥ ॐ काहलये नमः॥ ॐ सर्वकामदाय नमः॥ ॐ सर्वकालप्रसादाय नमः॥ ॐ सुबलाय नमः॥ ॐ बलरूपधृगे नमः॥ (300)

ॐ सर्वकामवराय नमः॥ ॐ सर्वदाय नमः॥ ॐ सर्वतोमुखाय नमः॥ ॐ आकाशनिर्विरूपाय नमः॥ ॐ निपातिने नमः॥ ॐ अवशाय नमः॥ ॐ खगाय नमः॥ ॐ रौद्ररूपाय नमः॥ ॐ अंशवे नमः॥ ॐ आदित्याय नमः॥ ॐ बहुरश्मये नमः॥ ॐ सुवर्चसिने नमः॥ ॐ वसुवेगाय नमः॥ ॐ महावेगाय नमः॥ ॐ मनोवेगाय नमः॥ ॐ निशाचराय नमः॥ ॐ सर्ववासिने नमः॥ ॐ श्रियावासिने नमः॥ ॐ उपदेशकराय नमः॥ ॐ अकराय नमः॥ ॐ मुनये नमः॥ ॐ आत्मनिरालोकाय नमः॥ ॐ संभग्नाय नमः॥ ॐ सहस्रदाय नमः॥ ॐ पक्षिणे नमः॥ ॐ पक्षरूपाय नमः॥ ॐ अतिदीप्ताय नमः॥ ॐ विशाम्पतये नमः॥ ॐ उन्मादाय नमः॥ ॐ मदनाय नमः॥ ॐ कामाय नमः॥ ॐ अश्वत्थाय नमः॥ ॐ अर्थकराय नमः॥ ॐ यशसे नमः॥ ॐ वामदेवाय नमः॥ ॐ वामाय नमः॥ ॐ प्राचे नमः॥ ॐ दक्षिणाय नमः॥ ॐ वामनाय नमः॥ ॐ सिद्धयोगिने नमः॥ ॐ महर्षये नमः॥ ॐ सिद्धार्थाय नमः॥ ॐ सिद्धसाधकाय नमः॥ ॐ भिक्षवे नमः॥ ॐ भिक्षुरूपाय नमः॥ ॐ विपणाय नमः॥ ॐ मृदवे नमः॥ ॐ अव्ययाय नमः॥ ॐ महासेनाय नमः॥ ॐ विशाखाय नमः॥ (350)

ॐ षष्टिभागाय नमः॥ ॐ गवाम्पतये नमः॥ ॐ वज्रहस्ताय नमः॥ ॐ विष्कम्भिने नमः॥ ॐ चमुस्तंभनाय नमः॥ ॐ वृत्तावृत्तकराय नमः॥ ॐ तालाय नमः॥ ॐ मधवे नमः॥ ॐ मधुकलोचनाय नमः॥ ॐ वाचस्पतये नमः॥ ॐ वाजसनाय नमः॥ ॐ नित्यमाश्रमपूजिताय नमः॥ ॐ ब्रह्मचारिणे नमः॥ ॐ लोकचारिणे नमः॥ ॐ सर्वचारिणे नमः॥ ॐ विचारविदे नमः॥ ॐ ईशानाय नमः॥ ॐ ईश्वराय नमः॥ ॐ कालाय नमः॥ ॐ निशाचारिणे नमः॥ ॐ पिनाकधृगे नमः॥ ॐ निमितस्थाय नमः॥ ॐ निमित्ताय नमः॥ ॐ नन्दये नमः॥ ॐ नन्दिकराय नमः॥ ॐ हरये नमः॥ ॐ नन्दीश्वराय नमः॥ ॐ नन्दिने नमः॥ ॐ नन्दनाय नमः॥ ॐ नंन्दीवर्धनाय नमः॥ ॐ भगहारिणे नमः॥ ॐ निहन्त्रे नमः॥ ॐ कालाय नमः॥ ॐ ब्रह्मणे नमः॥ ॐ पितामहाय नमः॥ ॐ चतुर्मुखाय नमः॥ ॐ महालिंगाय नमः॥ ॐ चारूलिंगाय नमः॥ ॐ लिंगाध्यक्षाय नमः॥ ॐ सुराध्यक्षाय नमः॥ ॐ योगाध्यक्षाय नमः॥ ॐ युगावहाय नमः॥ ॐ बीजाध्यक्षाय नमः॥ ॐ बीजकर्त्रे नमः॥ ॐ अध्यात्मानुगताय नमः॥ ॐ बलाय नमः॥ ॐ इतिहासाय नमः॥ ॐ सकल्पाय नमः॥ ॐ गौतमाय नमः॥ ॐ निशाकराय नमः॥ (400)
 
ॐ दम्भाय नमः॥ ॐ अदम्भाय नमः॥ ॐ वैदम्भाय नमः॥ ॐ वश्याय नमः॥ ॐ वशकराय नमः॥ ॐ कलये नमः॥ ॐ लोककर्त्रे नमः॥ ॐ पशुपतये नमः॥ ॐ महाकर्त्रे नमः॥ ॐ अनौषधाय नमः॥ ॐ अक्षराय नमः॥ ॐ परब्रह्मणे नमः॥ ॐ बलवते नमः॥ ॐ शक्राय नमः॥ ॐ नीतये नमः॥ ॐ अनीतये नमः॥ ॐ शुद्धात्मने नमः॥ ॐ मान्याय नमः॥ ॐ शुद्धाय नमः॥ ॐ गतागताय नमः॥ ॐ बहुप्रसादाय नमः॥ ॐ सुस्पप्नाय नमः॥ ॐ दर्पणाय नमः॥ ॐ अमित्रजिते नमः॥ ॐ वेदकराय नमः॥ ॐ मंत्रकराय नमः॥ ॐ विदुषे नमः॥ ॐ समरमर्दनाय नमः॥ ॐ महामेघनिवासिने नमः॥ ॐ महाघोराय नमः॥ ॐ वशिने नमः॥ ॐ कराय नमः॥ ॐ अग्निज्वालाय नमः॥ ॐ महाज्वालाय नमः॥ ॐ अतिधूम्राय नमः॥ ॐ हुताय नमः॥ ॐ हविषे नमः॥ ॐ वृषणाय नमः॥ ॐ शंकराय नमः॥ ॐ नित्यंवर्चस्विने नमः॥ ॐ धूमकेताय नमः॥ ॐ नीलाय नमः॥ ॐ अंगलुब्धाय नमः॥ ॐ शोभनाय नमः॥ ॐ निरवग्रहाय नमः॥ ॐ स्वस्तिदायकाय नमः॥ ॐ स्वस्तिभावाय नमः॥ ॐ भागिने नमः॥ ॐ भागकराय नमः॥ ॐ लघवे नमः॥(450)
 
ॐ उत्संगाय नमः॥ ॐ महांगाय नमः॥ ॐ महागर्भपरायणाय नमः॥ ॐ कृष्णवर्णाय नमः॥ ॐ सुवर्णाय नमः॥ ॐ सर्वदेहिनामिनिन्द्राय नमः॥ ॐ महापादाय नमः॥ ॐ महाहस्ताय नमः॥ ॐ महाकायाय नमः॥ ॐ महायशसे नमः॥ ॐ महामूर्धने नमः॥ ॐ महामात्राय नमः॥ ॐ महानेत्राय नमः॥ ॐ निशालयाय नमः॥ ॐ महान्तकाय नमः॥ ॐ महाकर्णाय नमः॥ ॐ महोष्ठाय नमः॥ ॐ महाहनवे नमः॥ ॐ महानासाय नमः॥ ॐ महाकम्बवे नमः॥ ॐ महाग्रीवाय नमः॥ ॐ श्मशानभाजे नमः॥ ॐ महावक्षसे नमः॥ ॐ महोरस्काय नमः॥ ॐ अंतरात्मने नमः॥ ॐ मृगालयाय नमः॥ ॐ लंबनाय नमः॥ ॐ लम्बितोष्ठाय नमः॥ ॐ महामायाय नमः॥ ॐ पयोनिधये नमः॥ ॐ महादन्ताय नमः॥ ॐ महाद्रष्टाय नमः॥ ॐ महाजिह्वाय नमः॥ ॐ महामुखाय नमः॥ ॐ महारोम्णे नमः॥ ॐ महाकोशाय नमः॥ ॐ महाजटाय नमः॥ ॐ प्रसन्नाय नमः॥ ॐ प्रसादाय नमः॥ ॐ प्रत्ययाय नमः॥ ॐ गिरिसाधनाय नमः॥ ॐ स्नेहनाय नमः॥ ॐ अस्नेहनाय नमः॥ ॐ अजिताय नमः॥ ॐ महामुनये नमः॥ ॐ वृक्षाकाराय नमः॥ ॐ वृक्षकेतवे नमः॥ ॐ अनलाय नमः॥ ॐ वायुवाहनाय नमः॥ (500)

ॐ गण्डलिने नमः॥ ॐ मेरूधाम्ने नमः॥ ॐ देवाधिपतये नमः॥ ॐ अथर्वशीर्षाय नमः॥ ॐ सामास्या नमः॥ ॐ ऋक्सहस्रामितेक्षणाय नमः॥ ॐ यजुः॥ पादभुजाय नमः॥ ॐ गुह्याय नमः॥ ॐ प्रकाशाय नमः॥ ॐ जंगमाय नमः॥ ॐ अमोघार्थाय नमः॥ ॐ प्रसादाय नमः॥ ॐ अभिगम्याय नमः॥ ॐ सुदर्शनाय नमः॥ ॐ उपकाराय नमः॥ ॐ प्रियाय नमः॥ ॐ सर्वाय नमः॥ ॐ कनकाय नमः॥ ॐ काञ्चनवच्छये नमः॥ ॐ नाभये नमः॥ ॐ नन्दिकराय नमः॥ ॐ भावाय नमः॥ ॐ पुष्करथपतये नमः॥ ॐ स्थिराय नमः॥ ॐ द्वादशाय नमः॥ ॐ त्रासनाय नमः॥ ॐ आद्याय नमः॥ ॐ यज्ञाय नमः॥ ॐ यज्ञसमाहिताय नमः॥ ॐ नक्तंस्वरूपाय नमः॥ ॐ कलये नमः॥ ॐ कालाय नमः॥ ॐ मकराय नमः॥ ॐ कालपूजिताय नमः॥ ॐ सगणाय नमः॥ ॐ गणकराय नमः॥ ॐ भूतवाहनसारथये नमः॥ ॐ भस्मशयाय नमः॥ ॐ भस्मगोप्त्रे नमः॥ ॐ भस्मभूताय नमः॥ ॐ तरवे नमः॥ ॐ गणाय नमः॥ ॐ लोकपालाय नमः॥ ॐ आलोकाय नमः॥ ॐ महात्मने नमः॥ ॐ सर्वपूजिताय नमः॥ ॐ शुक्लाय नमः॥ ॐ त्रिशुक्लाय नमः॥ ॐ संपन्नाय नमः॥ ॐ शुचये नमः॥ (550)

ॐ भूतनिशेविताय नमः॥ ॐ आश्रमस्थाय नमः॥ ॐ क्रियावस्थाय नमः॥ ॐ विश्वकर्ममतये नमः॥ ॐ वराय नमः॥ ॐ विशालशाखाय नमः॥ ॐ ताम्रोष्ठाय नमः॥ ॐ अम्बुजालाय नमः॥ ॐ सुनिश्चलाय नमः॥ ॐ कपिलाय नमः॥ ॐ कपिशाय नमः॥ ॐ शुक्लाय नमः॥ ॐ आयुषे नमः॥ ॐ पराय नमः॥ ॐ अपराय नमः॥ ॐ गंधर्वाय नमः॥ ॐ अदितये नमः॥ ॐ ताक्ष्याय नमः॥ ॐ सुविज्ञेयाय नमः॥ ॐ सुशारदाय नमः॥ ॐ परश्वधायुधाय नमः॥ ॐ देवाय नमः॥ ॐ अनुकारिणे नमः॥ ॐ सुबान्धवाय नमः॥ ॐ तुम्बवीणाय नमः॥ ॐ महाक्रोधाय नमः॥ ॐ ऊर्ध्वरेतसे नमः॥ ॐ जलेशयाय नमः॥ ॐ उग्राय नमः॥ ॐ वंशकराय नमः॥ ॐ वंशाय नमः॥ ॐ वंशानादाय नमः॥ ॐ अनिन्दिताय नमः॥ ॐ सर्वांगरूपाय नमः॥ ॐ मायाविने नमः॥ ॐ सुहृदे नमः॥ ॐ अनिलाय नमः॥ ॐ अनलाय नमः॥ ॐ बन्धनाय नमः॥ ॐ बन्धकर्त्रे नमः॥ ॐ सुवन्धनविमोचनाय नमः॥ ॐ सयज्ञयारये नमः॥ ॐ सकामारये नमः॥ ॐ महाद्रष्टाय नमः॥ ॐ महायुधाय नमः॥ ॐ बहुधानिन्दिताय नमः॥ ॐ शर्वाय नमः॥ ॐ शंकराय नमः॥ ॐ शं कराय नमः॥ ॐ अधनाय नमः॥ (600)

ॐ अमरेशाय नमः॥ ॐ महादेवाय नमः॥ ॐ विश्वदेवाय नमः॥ ॐ सुरारिघ्ने नमः॥ ॐ अहिर्बुद्धिन्याय नमः॥ ॐ अनिलाभाय नमः॥ ॐ चेकितानाय नमः॥ ॐ हविषे नमः॥ ॐ अजैकपादे नमः॥ ॐ कापालिने नमः॥ ॐ त्रिशंकवे नमः॥ ॐ अजिताय नमः॥ ॐ शिवाय नमः॥ ॐ धन्वन्तरये नमः॥ ॐ धूमकेतवे नमः॥ ॐ स्कन्दाय नमः॥ ॐ वैश्रवणाय नमः॥ ॐ धात्रे नमः॥ ॐ शक्राय नमः॥ ॐ विष्णवे नमः॥ ॐ मित्राय नमः॥ ॐ त्वष्ट्रे नमः॥ ॐ ध्रुवाय नमः॥ ॐ धराय नमः॥ ॐ प्रभावाय नमः॥ ॐ सर्वगोवायवे नमः॥ ॐ अर्यम्णे नमः॥ ॐ सवित्रे नमः॥ ॐ रवये नमः॥ ॐ उषंगवे नमः॥ ॐ विधात्रे नमः॥ ॐ मानधात्रे नमः॥ ॐ भूतवाहनाय नमः॥ ॐ विभवे नमः॥ ॐ वर्णविभाविने नमः॥ ॐ सर्वकामगुणवाहनाय नमः॥ ॐ पद्मनाभाय नमः॥ ॐ महागर्भाय नमः॥ चन्द्रवक्त्राय नमः॥ ॐ अनिलाय नमः॥ ॐ अनलाय नमः॥ ॐ बलवते नमः॥ ॐ उपशान्ताय नमः॥ ॐ पुराणाय नमः॥ ॐ पुण्यचञ्चवे नमः॥ ॐ ईरूपाय नमः॥ ॐ कुरूकर्त्रे नमः॥ ॐ कुरूवासिने नमः॥ ॐ कुरूभूताय नमः॥ ॐ गुणौषधाय नमः॥ (650)

ॐ सर्वाशयाय नमः॥ ॐ दर्भचारिणे नमः॥ ॐ सर्वप्राणिपतये नमः॥ ॐ देवदेवाय नमः॥ ॐ सुखासक्ताय नमः॥ ॐ सत स्वरूपाय नमः॥ ॐ असत् रूपाय नमः॥ ॐ सर्वरत्नविदे नमः॥ ॐ कैलाशगिरिवासने नमः॥ ॐ हिमवद्गिरिसंश्रयाय नमः॥ ॐ कूलहारिणे नमः॥ ॐ कुलकर्त्रे नमः॥ ॐ बहुविद्याय नमः॥ ॐ बहुप्रदाय नमः॥ ॐ वणिजाय नमः॥ ॐ वर्धकिने नमः॥ ॐ वृक्षाय नमः॥ ॐ बकुलाय नमः॥ ॐ चंदनाय नमः॥ ॐ छदाय नमः॥ ॐ सारग्रीवाय नमः॥ ॐ महाजत्रवे नमः॥ ॐ अलोलाय नमः॥ ॐ महौषधाय नमः॥ ॐ सिद्धार्थकारिणे नमः॥ ॐ छन्दोव्याकरणोत्तर-सिद्धार्थाय नमः॥ ॐ सिंहनादाय नमः॥ ॐ सिंहद्रंष्टाय नमः॥ ॐ सिंहगाय नमः॥ ॐ सिंहवाहनाय नमः॥ ॐ प्रभावात्मने नमः॥ ॐ जगतकालस्थालाय नमः॥ ॐ लोकहिताय नमः॥ ॐ तरवे नमः॥ ॐ सारंगाय नमः॥ ॐ नवचक्रांगाय नमः॥ ॐ केतुमालिने नमः॥ ॐ सभावनाय नमः॥ ॐ भूतालयाय नमः॥ ॐ भूतपतये नमः॥ ॐ अहोरात्राय नमः॥ ॐ अनिन्दिताय नमः॥ ॐ सर्वभूतवाहित्रे नमः॥ ॐ सर्वभूतनिलयाय नमः॥ ॐ विभवे नमः॥ ॐ भवाय नमः॥ ॐ अमोघाय नमः॥ ॐ संयताय नमः॥ ॐ अश्वाय नमः॥ ॐ भोजनाय नमः॥(700)

ॐ प्राणधारणाय नमः॥ ॐ धृतिमते नमः॥ ॐ मतिमते नमः॥ ॐ दक्षाय नमः॥ ॐ सत्कृयाय नमः॥ ॐ युगाधिपाय नमः॥ ॐ गोपाल्यै नमः॥ ॐ गोपतये नमः॥ ॐ ग्रामाय नमः॥ ॐ गोचर्मवसनाय नमः॥ ॐ हरये नमः॥ ॐ हिरण्यबाहवे नमः॥ ॐ प्रवेशिनांगुहापालाय नमः॥ ॐ प्रकृष्टारये नमः॥ ॐ महाहर्षाय नमः॥ ॐ जितकामाय नमः॥ ॐ जितेन्द्रियाय नमः॥ ॐ गांधाराय नमः॥ ॐ सुवासाय नमः॥ ॐ तपः॥सक्ताय नमः॥ ॐ रतये नमः॥ ॐ नराय नमः॥ ॐ महागीताय नमः॥ ॐ महानृत्याय नमः॥ ॐ अप्सरोगणसेविताय नमः॥ ॐ महाकेतवे नमः॥ ॐ महाधातवे नमः॥ ॐ नैकसानुचराय नमः॥ ॐ चलाय नमः॥ ॐ आवेदनीयाय नमः॥ ॐ आदेशाय नमः॥ ॐ सर्वगंधसुखावहाय नमः॥ ॐ तोरणाय नमः॥ ॐ तारणाय नमः॥ ॐ वाताय नमः॥ ॐ परिधये नमः॥ ॐ पतिखेचराय नमः॥ ॐ संयोगवर्धनाय नमः॥ ॐ वृद्धाय नमः॥ ॐ गुणाधिकाय नमः॥ ॐ अतिवृद्धाय नमः॥ ॐ नित्यात्मसहायाय नमः॥ ॐ देवासुरपतये नमः॥ ॐ पत्ये नमः॥ ॐ युक्ताय नमः॥ ॐ युक्तबाहवे नमः॥ ॐ दिविसुपर्वदेवाय नमः॥ ॐ आषाढाय नमः॥ ॐ सुषाढ़ाय नमः॥ ॐ ध्रुवाय नमः॥ (750)

ॐ हरिणाय नमः॥ ॐ हराय नमः॥ ॐ आवर्तमानवपुषे नमः॥ ॐ वसुश्रेष्ठाय नमः॥ ॐ महापथाय नमः॥ ॐ विमर्षशिरोहारिणे नमः॥ ॐ सर्वलक्षणलक्षिताय नमः॥ ॐ अक्षरथयोगिने नमः॥ ॐ सर्वयोगिने नमः॥ ॐ महाबलाय नमः॥ ॐ समाम्नायाय नमः॥ ॐ असाम्नायाय नमः॥ ॐ तीर्थदेवाय नमः॥ ॐ महारथाय नमः॥ ॐ निर्जीवाय नमः॥ ॐ जीवनाय नमः॥ ॐ मंत्राय नमः॥ ॐ शुभाक्षाय नमः॥ ॐ बहुकर्कशाय नमः॥ ॐ रत्नप्रभूताय नमः॥ ॐ रत्नांगाय नमः॥ ॐ महार्णवनिपानविदे नमः॥ ॐ मूलाय नमः॥ ॐ विशालाय नमः॥ ॐ अमृताय नमः॥ ॐ व्यक्ताव्यवक्ताय नमः॥ ॐ तपोनिधये नमः॥ ॐ आरोहणाय नमः॥ ॐ अधिरोहाय नमः॥ ॐ शीलधारिणे नमः॥ ॐ महायशसे नमः॥ ॐ सेनाकल्पाय नमः॥ ॐ महाकल्पाय नमः॥ ॐ योगाय नमः॥ ॐ युगकराय नमः॥ ॐ हरये नमः॥ ॐ युगरूपाय नमः॥ ॐ महारूपाय नमः॥ ॐ महानागहतकाय नमः॥ ॐ अवधाय नमः॥ ॐ न्यायनिर्वपणाय नमः॥ ॐ पादाय नमः॥ ॐ पण्डिताय नमः॥ ॐ अचलोपमाय नमः॥ ॐ बहुमालाय नमः॥ ॐ महामालाय नमः॥ ॐ शशिहरसुलोचनाय नमः॥ ॐ विस्तारलवणकूपाय नमः॥ ॐ त्रिगुणाय नमः॥ ॐ सफलोदयाय नमः॥ (800)

ॐ त्रिलोचनाय नमः॥ ॐ विषण्डागाय नमः॥ ॐ मणिविद्धाय नमः॥ ॐ जटाधराय नमः॥ ॐ बिन्दवे नमः॥ ॐ विसर्गाय नमः॥ ॐ सुमुखाय नमः॥ ॐ शराय नमः॥ ॐ सर्वायुधाय नमः॥ ॐ सहाय नमः॥ ॐ सहाय नमः॥ ॐ निवेदनाय नमः॥ ॐ सुखाजाताय नमः॥ ॐ सुगन्धराय नमः॥ ॐ महाधनुषे नमः॥ ॐ गंधपालिभगवते नमः॥ ॐ सर्वकर्मोत्थानाय नमः॥ ॐ मन्थानबहुलवायवे नमः॥ ॐ सकलाय नमः॥ ॐ सर्वलोचनाय नमः॥ ॐ तलस्तालाय नमः॥ ॐ करस्थालिने नमः॥ ॐ ऊर्ध्वसंहननाय नमः॥ ॐ महते नमः॥ ॐ छात्राय नमः॥ ॐ सुच्छत्राय नमः॥ ॐ विख्यातलोकाय नमः॥ ॐ सर्वाश्रयक्रमाय नमः॥ ॐ मुण्डाय नमः॥ ॐ विरूपाय नमः॥ ॐ विकृताय नमः॥ ॐ दण्डिने नमः॥ ॐ कुदण्डिने नमः॥ ॐ विकुर्वणाय नमः॥ ॐ हर्यक्षाय नमः॥ ॐ ककुभाय नमः॥ ॐ वज्रिणे नमः॥ ॐ शतजिह्वाय नमः॥ ॐ सहस्रपदे नमः॥ ॐ देवेन्द्राय नमः॥ ॐ सर्वदेवमयाय नमः॥ ॐ गुरवे नमः॥ ॐ सहस्रबाहवे नमः॥ ॐ सर्वांगाय नमः॥ ॐ शरण्याय नमः॥ ॐ सर्वलोककृते नमः॥ ॐ पवित्राय नमः॥ ॐ त्रिककुन्मंत्राय नमः॥ ॐ कनिष्ठाय नमः॥ ॐ कृष्णपिंगलाय नमः॥ (850)

ॐ ब्रह्मदण्डविनिर्मात्रे नमः॥ ॐ शतघ्नीपाशशक्तिमते नमः॥ ॐ पद्मगर्भाय नमः॥ ॐ महागर्भाय नमः॥ ॐ ब्रह्मगर्भाय नमः॥ ॐ जलोद्भावाय नमः॥ ॐ गभस्तये नमः॥ ॐ ब्रह्मकृते नमः॥ ॐ ब्रह्मिणे नमः॥ ॐ ब्रह्मविदे नमः॥ ॐ ब्राह्मणाय नमः॥ ॐ गतये नमः॥ ॐ अनंतरूपाय नमः॥ ॐ नैकात्मने नमः॥ ॐ स्वयंभुवतिग्मतेजसे नमः॥ ॐ उर्ध्वगात्मने नमः॥ ॐ पशुपतये नमः॥ ॐ वातरंहसे नमः॥ ॐ मनोजवाय नमः॥ ॐ चंदनिने नमः॥ ॐ पद्मनालाग्राय नमः॥ ॐ सुरभ्युत्तारणाय नमः॥ ॐ नराय नमः॥ ॐ कर्णिकारमहास्रग्विणमे नमः॥ ॐ नीलमौलये नमः॥ ॐ पिनाकधृषे नमः॥ ॐ उमापतये नमः॥ ॐ उमाकान्ताय नमः॥ ॐ जाह्नवीधृषे नमः॥ ॐ उमादवाय नमः॥ ॐ वरवराहाय नमः॥ ॐ वरदाय नमः॥ ॐ वरेण्याय नमः॥ ॐ सुमहास्वनाय नमः॥ ॐ महाप्रसादाय नमः॥ ॐ दमनाय नमः॥ ॐ शत्रुघ्ने नमः॥ ॐ श्वेतपिंगलाय नमः॥ ॐ पीतात्मने नमः॥ ॐ परमात्मने नमः॥ ॐ प्रयतात्मने नमः॥ ॐ प्रधानधृषे नमः॥ ॐ सर्वपार्श्वमुखाय नमः॥ ॐ त्रक्षाय नमः॥ ॐ धर्मसाधारणवराय नमः॥ ॐ चराचरात्मने नमः॥ ॐ सूक्ष्मात्मने नमः॥ ॐ अमृतगोवृषेश्वराय नमः॥ ॐ साध्यर्षये नमः॥ ॐ आदित्यवसवे नमः॥ (900)

ॐ विवस्वत्सवित्रमृताय नमः॥ ॐ व्यासाय नमः॥ ॐ सर्गसुसंक्षेपविस्तराय नमः॥ ॐ पर्ययोनराय नमः॥ ॐ ऋतवे नमः॥ ॐ संवत्सराय नमः॥ ॐ मासाय नमः॥ ॐ पक्षाय नमः॥ ॐ संख्यासमापनाय नमः॥ ॐ कलायै नमः॥ ॐ काष्ठायै नमः॥ ॐ लवेभ्यो नमः॥ ॐ मात्रेभ्यो नमः॥ ॐ मुहूर्ताहः॥क्षपाभ्यो नमः॥ ॐ क्षणेभ्यो नमः॥ ॐ विश्वक्षेत्राय नमः॥ ॐ प्रजाबीजाय नमः॥ ॐ लिंगाय नमः॥ ॐ आद्यनिर्गमाय नमः॥ ॐ सत् स्वरूपाय नमः॥ ॐ असत् रूपाय नमः॥ ॐ व्यक्ताय नमः॥ ॐ अव्यक्ताय नमः॥ ॐ पित्रे नमः॥ ॐ मात्रे नमः॥ ॐ पितामहाय नमः॥ ॐ स्वर्गद्वाराय नमः॥ ॐ प्रजाद्वाराय नमः॥ ॐ मोक्षद्वाराय नमः॥ ॐ त्रिविष्टपाय नमः॥ ॐ निर्वाणाय नमः॥ ॐ ह्लादनाय नमः॥ ॐ ब्रह्मलोकाय नमः॥ ॐ परागतये नमः॥ ॐ देवासुरविनिर्मात्रे नमः॥ ॐ देवासुरपरायणाय नमः॥ ॐ देवासुरगुरूवे नमः॥ ॐ देवाय नमः॥ ॐ देवासुरनमस्कृताय नमः॥ ॐ देवासुरमहामात्राय नमः॥ ॐ देवासुरमहामात्राय नमः॥ ॐ देवासुरगणाश्रयाय नमः॥ ॐ देवासुरगणाध्यक्षाय नमः॥ ॐ देवासुरगणाग्रण्ये नमः॥ ॐ देवातिदेवाय नमः॥ ॐ देवर्षये नमः॥ ॐ देवासुरवरप्रदाय नमः॥ ॐ विश्वाय नमः॥ ॐ देवासुरमहेश्वराय नमः॥ ॐ सर्वदेवमयाय नमः॥(950)

ॐ अचिंत्याय नमः॥ ॐ देवात्मने नमः॥ ॐ आत्मसंबवाय नमः॥ ॐ उद्भिदे नमः॥ ॐ त्रिविक्रमाय नमः॥ ॐ वैद्याय नमः॥ ॐ विरजाय नमः॥ ॐ नीरजाय नमः॥ ॐ अमराय नमः॥ ॐ इड्याय नमः॥ ॐ हस्तीश्वराय नमः॥ ॐ व्याघ्राय नमः॥ ॐ देवसिंहाय नमः॥ ॐ नरर्षभाय नमः॥ ॐ विभुदाय नमः॥ ॐ अग्रवराय नमः॥ ॐ सूक्ष्माय नमः॥ ॐ सर्वदेवाय नमः॥ ॐ तपोमयाय नमः॥ ॐ सुयुक्ताय नमः॥ ॐ शोभनाय नमः॥ ॐ वज्रिणे नमः॥ ॐ प्रासानाम्प्रभवाय नमः॥ ॐ अव्ययाय नमः॥ ॐ गुहाय नमः॥ ॐ कान्ताय नमः॥ ॐ निजसर्गाय नमः॥ ॐ पवित्राय नमः॥ ॐ सर्वपावनाय नमः॥ ॐ श्रृंगिणे नमः॥ ॐ श्रृंगप्रियाय नमः॥ ॐ बभ्रवे नमः॥ ॐ राजराजाय नमः॥ ॐ निरामयाय नमः॥ ॐ अभिरामाय नमः॥ ॐ सुरगणाय नमः॥ ॐ विरामाय नमः॥ ॐ सर्वसाधनाय नमः॥ ॐ ललाटाक्षाय नमः॥ ॐ विश्वदेवाय नमः॥ ॐ हरिणाय नमः॥ ॐ ब्रह्मवर्चसे नमः॥ ॐ स्थावरपतये नमः॥ ॐ नियमेन्द्रियवर्धनाय नमः॥ ॐ सिद्धार्थाय नमः॥ ॐ सिद्धभूतार्थाय नमः॥ ॐ अचिन्ताय नमः॥ ॐ सत्यव्रताय नमः॥ ॐ शुचये नमः॥ ॐ व्रताधिपाय नमः॥ ॐ पराय नमः॥ ॐ ब्रह्मणे नमः॥ ॐ भक्तानांपरमागतये नमः॥ ॐ विमुक्ताय नमः॥ ॐ मुक्ततेजसे नमः॥ ॐ श्रीमते नमः॥ ॐ श्रीवर्धनाय नमः॥ ॐ श्री जगते नमः॥ 
(1000 )

ॐ पूर्णमदः॥ पूर्णमिदं पूर्णात पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।
ॐ शांतिः॥ शांतिः॥ शांतिः॥
"Mahakal ki kripa se sab kaam ho raha hai" mahadev shiv best song ever 2019|महादेव|