भारत में वाहन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण नियम, प्रावधान, कानून और सुविधाएं हैं, जो सड़क सुरक्षा, वाहन पंजीकरण, लाइसेंसिंग, और पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित हैं। यहाँ कुछ प्रमुख नियम और कानून दिए गए हैं जो आपके वाहन से जुड़ी जिम्मेदारियों और सुविधाओं को स्पष्ट करते हैं:
1. वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस
- वाहन पंजीकरण:
- भारत में सभी वाहनों को रोड ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) से पंजीकृत कराना होता है। यह पंजीकरण वाहन के मालिक को एक पंजीकरण संख्या (RTO नंबर) देता है।
- पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC) वाहन के साथ होना चाहिए और इसे रिन्यू भी किया जाता है।
- ड्राइविंग लाइसेंस:
- भारत में किसी भी मोटर वाहन को चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य है।
- यह लाइसेंस राष्ट्रीय सड़क परिवहन प्राधिकरण (RTO) द्वारा जारी किया जाता है और यह निर्धारित करता है कि वाहन चालक के पास जरूरी कौशल है या नहीं।
2. बीमा (Insurance)
- वाहन बीमा:
- भारतीय कानून के तहत, तीसरी पार्टी बीमा (Third-Party Insurance) हर वाहन के लिए अनिवार्य है। यह बीमा दुर्घटना में दूसरों की संपत्ति या जीवन को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में वाहन मालिक की जिम्मेदारी को कवर करता है।
- कॉम्प्रिहेन्सिव बीमा (Comprehensive Insurance) एक विकल्प है, जो वाहन के खुद के नुकसान, चोरी, और अन्य घटनाओं को भी कवर करता है।
3. सड़क सुरक्षा नियम
- सीट बेल्ट और हेलमेट:
- सीट बेल्ट का उपयोग ड्राइवर और सामने बैठे यात्री के लिए अनिवार्य है।
- हेलमेट का उपयोग बाइक सवारों के लिए अनिवार्य है।
- स्पीड लिमिट:
- प्रत्येक सड़क पर एक निर्धारित स्पीड लिमिट होती है, और उसे पार करना गैरकानूनी है।
- सड़कों पर स्पीड लिमिट की सीमा आमतौर पर 40-80 किमी/घंटा होती है, हालांकि यह सड़क की श्रेणी और शहर के इलाके पर निर्भर करता है।
- नशे में वाहन चलाना:
- शराब पीकर वाहन चलाना अपराध है। धार्मिक या दवाइयों के प्रभाव में वाहन चलाने पर जुर्माना और लाइसेंस निलंबन हो सकता है।
- फास्ट ट्रैक ट्रांसपोर्ट:
- फास्ट टैग (Fastag) को लागू किया गया है, जो टोल शुल्क के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से भुगतान की सुविधा देता है, जिससे टोल प्लाजा पर यातायात में देरी कम होती है।
4. पर्यावरणीय नियम
- बीएस-IV और बीएस-VI (BS-IV, BS-VI) प्रदूषण मानक:
- भारत सरकार ने वाहन प्रदूषण मानकों को कड़ा किया है। बीएस-वीआई (BS-VI) मानक 2020 से लागू हो गए हैं, जो वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त हैं।
- वाहनों के लिए अधिक ईंधन दक्षता और कम प्रदूषण के लिए इन मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
5. वाहन की स्थिति और रखरखाव
- रजिस्टर्ड वाहन की स्थिति:
- वाहनों को नियमित रूप से पढ़ाई और देखभाल की जरूरत होती है। यह सुनिश्चित करता है कि वाहन चालू और सुरक्षित स्थिति में हो।
- ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्ट (Fitness Test):
- पुराने वाहनों को एक निश्चित उम्र के बाद फिटनेस टेस्ट से गुजरना पड़ता है। यह सुनिश्चित करता है कि वाहन सड़कों पर चलने के लिए फिट है और प्रदूषण मानकों का पालन करता है।
6. यातायात नियम और अपराध
- ट्रैफिक उल्लंघन:
- यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और सजा हो सकती है। कुछ प्रमुख उल्लंघनों में ओवरस्पीडिंग, सिग्नल तोड़ना, फोन पर बात करना, और लाइसेंस न होना शामिल हैं।
- मल्टीलेवल पेनल्टी सिस्टम (यातायात अधिनियम) लागू किया गया है, जिसमें उल्लंघन करने पर मोटा जुर्माना लगता है।
- वाहन चेकिंग और जांच:
- पुलिस किसी भी वाहन की जांच कर सकती है, जिसमें डोक्यूमेंट्स (RC, बीमा, ड्राइविंग लाइसेंस, PUC) की जांच की जाती है। यह जांच सड़क पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जाती है।
7. वाहन से जुड़ी सुविधाएं
- फास्टैग (Fastag):
- फास्टैग एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है, जो वाहन चालकों को बिना रुके टोल प्लाजा पार करने की सुविधा प्रदान करता है। यह राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनिवार्य है।
- सार्वजनिक परिवहन:
- कैब सेवाएं (Uber, Ola, आदि) और ऑनलाइन राइड-शेयरिंग प्लेटफॉर्म्स ने यात्रा को और सुविधाजनक बना दिया है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs):
- भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है, और इसके लिए कई सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन और प्रोत्साहन योजनाएं भी उपलब्ध हैं।
8. वाहन से संबंधित कर और शुल्क
- रोड टैक्स:
- प्रत्येक वाहन पर एक निर्धारित रोड टैक्स होता है, जो वाहन की पंजीकरण की अवधि के आधार पर होता है। यह टैक्स RTO द्वारा वाहन पंजीकरण के समय लिया जाता है।
- फ्यूल टैक्स:
- पेट्रोल और डीजल पर उच्च कर लगाया जाता है, जो वाहन चालकों के लिए एक अतिरिक्त खर्च है।
9. वाहन चालकों के लिए सुरक्षात्मक उपाय
- ब्लाइंड स्पॉट:
- वाहन में ब्लाइंड स्पॉट से बचने के लिए पीछे और साइड में साइड मोल्डिंग और सेंसर लगाए जा सकते हैं।
- एयरबैग और एंटी-लॉक ब्रेक सिस्टम (ABS):
- वाहन में एयरबैग और ABS जैसे सुरक्षा फीचर्स का होना अब अनिवार्य हो गया है।
सामान्य नियम दो-तरफ़ा सड़क पर बाईं ओर रहें ताकि विपरीत दिशा से आने वाला ट्रैफ़िक आपके दाईं ओर से निकल सके और एक-तरफ़ा सड़क पर पीछे से आने वाले वाहनों को आपके दाईं ओर से आगे निकलने की अनुमति दें। जब बाईं ओर मुड़ें तो जिस सड़क से आप जा रहे हैं उसके बाईं ओर रहें और जिस पर आप प्रवेश कर रहे हैं उसके बाईं ओर रहें।
सड़क पर सुरक्षा के लिये केवल वाहन चालक को ही नहीं बल्कि प्रत्येक पैदल यात्री तथा वाहन में सवार यात्रियों को भी यातायात के नियमों का पालन करना चाहिए । भी दुपहिया वाहन में अभिभावक के साथ बैठते समय अभिभावक को पकड़ कर बैठें। वाहन के चलने से पूर्व ही अपना हेलमेट पहन लें तथा अपने बड़ों को भी हेलमेट पहनने को कहें।
फिलहाल, 15 साल से पुराने वाहनों की अनिवार्य स्क्रैपिंग केवल दिल्ली-एनसीआर में लागू है. 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत, 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहन और 10 साल से पुराने डीजल वाहन दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर नहीं चल सकते
निष्कर्ष
भारत में वाहन से जुड़ी कई प्रमुख सुविधाएं और नियम हैं जो सुरक्षा, पर्यावरण, और सड़क पर यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। वाहन चलाने से पहले यह जरूरी है कि आप सभी नियमों और प्रावधानों का पालन करें, ताकि न केवल खुद की सुरक्षा हो, बल्कि दूसरों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- सड़क के बाईं ओर चलाएं गाड़ी
- जेब्रा क्रॉसिंग पार करने वाले पैदल यात्रियों का रखें ख्याल
- नशे में न चलाएं गाड़ी
- गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बात न करें
- इशारे, हॉर्न और संकेत का करें इस्तेमाल
- दूरी बनाए रखें
- सीट बेल्ट लगाना और हेलमेट पहनना जरूरी
नए अधिनियम में अब सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त लोगों के उपचार एवं सहायता के लिए भी अधिक ध्यान दिया गया है। दुर्घटना के उपरान्त शीघ्र चिकित्सकीय सहयता पहुँचा कर जनहानि पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया है। वाहनों को विनिर्माता द्वारा वापस कराये जाने का प्रावधान भी इस अधिनियम में किया गया है।
न्यू ट्रैफिक रूल्स के अंदर अब जो लोग ड्राइविंग करते वक्त मोबाइल बात करते हुए पाए जाते हैं उनपर 5000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं गलत दिशा में गाड़ी चलाने पर भी आप पर 5000 जुर्माना लगेगा। वहीं अगर आप खतरनाक तरीके से ड्राइविंग करते हैं, तो आप 5000 रुपए जुर्माना लगेगा।
नए नियमों में बिना वैध लाइसेंस के वाहन चलाने पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत अब जुर्माना 2,000 रुपये तक हो सकता है। नाबालिगों को वाहन चलाते हुए पकड़े जाने पर दंड अधिक कठोर होगा, जिसमें 25,000 रुपये का जुर्माना और माता-पिता के खिलाफ संभावित कार्रवाई के साथ-साथ वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द करना भी शामिल है।
मोटर वाहन का चालक वाहन को सड़क के बायीं ओर जितना संभव हो सके उतना निकट चलाएगा तथा उस दिशा में आने वाले समस्त यातायात को अपनी दायीं ओर से गुजरने देगा।
लोगों के मन में ये सवाल भी होता है कि चालान भरने के लिए कितना वक्त होता है और कब तक उन्हें इसकी पेमेंट करनी होती है. दरअसल चालान भरने के लिए आपको कुल 90 दिन का वक्त दिया जाता है, जिसमें आप ऑनलाइन ही वर्चुअल कोर्ट में अपना चालान भर सकते हैं
जिसमें टू-व्हीलर चलाने वालों के हेलमेट नहीं पहनने या फिर ठीक से हेलमेट नहीं पहनने पर 2,000 रुपये तक का तत्काल जुर्माना लगाया जाएगा। इतना ही नहीं अगर आपने हेलमेट पहना हो और वह खुला हुआ है यानी स्ट्रैप नहीं लगी है तो भी 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, अगर आप कुछ नियम तोड़ते हैं, तो आपको एक दिन में केवल एक ही चालान मिल सकता है और अगर आप कुछ नियम तोड़ते हैं, तो आपको एक ही दिन में कई बार जुर्माना भरना पड़ सकता है.
कार चलाते समय हमेशा सीट बेल्ट पहनें । हमें वाहन चलाते समय इयरफ़ोन लगाकर संगीत नहीं सुनना चाहिए। पीछे वाले वाहन को संकेत दिए बिना बाएं या दाएं मुड़ना नहीं चाहिए। किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए हमें वाहन को गति सीमा के भीतर चलाना चाहिए।
कोर्ट में आपको ऑनलाइन डॉक्यूमेंट्स और सबूत देने होंगे. कोर्ट तय करेगा की चालान माफ होगा या पेमेंट करनी होगी. अगर कोर्ट चालान जमा करने के लिए कहता है तो आपको ऑनलाइन ही चालान जमा करने का ऑप्शन मिलता है. एक बात का ध्यान रखें कि वर्चुअल कोर्ट, लोक अदालत नहीं होती हैं.
हम सभी जानते हैं कि गाड़ी चलाने के लिए ड्राइवर के पास ड्राइविंग लाइसेंस होना बहुत ही अनिवार्य है। बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाना कानूनन अपराध माना जाता है और इसके लिए आपका ₹5000 का चालान काटा जा सकता है।
नये प्रावधान ..
1 नया प्रावधान :PUC नही तो 3 साल होगी जैल RC होगी रद्द
2 अब बिना परेशानी वाहन RC होगी ट्रांसफर नही लगेंगे RTO के चक्कर
3 अब बना सकेंगे वाहन के लिए भी वसीयत
4 हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नही तो वाहन नही चलेंगे रोड पर
एडवोकेट प्रताप सिंह सुवाणा
1 puc आवश्यक
देश भर में गाड़ियों से हो रहे प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कई तरह के प्रयास किए है लेकिन इसके बाद भी वायु प्रदूषण रुक नहीं रहा है. इसी के तहत सरकार अब इसके लिए एक नया कानून लाने पर विचार कर रही है. सड़क परिवहन और महामार्ग मंत्रालय देश भर में सभी वाहनों के लिए एक प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) प्रणाली लागू करने करने का विचार कर रहा है. अगर गाड़ी चलाते वक्त आपके पास ये सर्टिफिकेट नहीं होगा तो आपका आरसी ( रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) तो जब्त होगा ही साथ ही आपको जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है.
मंत्रालय ने जमा कराया प्रस्ताव
लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक के मुताबिक परिवहन मंत्रालय ने इस बारे में अवगत कराने के लिए अपने प्रस्ताव जमा करा दिए हैं.
प्रस्ताव के मुताबिक पीयूसी सर्टिफिकेट के साथ आपको एक QR Code भी उपलब्ध काराया जाएगा. जिसमें गाड़ी के बारे में सभी जानकारी मौजूद होगी. जिसके जरिए सरकार को आपकी गाड़ी के बारे में जानकारी चाहिए वो मिल सकेगी.
इनको मिलेगी सजा
प्रस्ताव के पास होने जाने पर अगर किसी अधिकारी को चेकिंग करते वक्त ऐसा लगा की इस गाड़ी प्रदूषण फैल सकता है तो अधिकारी आपसे पीयूसी सर्टिफिकेट की मांग करेगा अगर आपके पास पीयूसी सर्टिफिकेट नहीं हुआ तो आप सजा के हकदार होंगे. ऐसा माना जा रहा है कि पीयूसी सिस्टम को दो से तीन महीने में ऑनलाइन भी कर दिया जाएगा.
कैसे काम करेगा यह सिस्टम
कानून में किये गये प्रस्तावित सुधार के अनुसार अधिकारी को यदि कोई वाहन प्रदूषण करता दिखा तो उसे वह उसे पीयूसी परीक्षण केंद्र में ले जा सकता है. सरकार के इस नये नियम के अनुसार वाहन मालिक को पीयूसी नहीं होने पर 3 महीने की जेल हो सकती है और उसका वाहन लाइसेंस जब्त करने की सजा भी सुनाई जा सकती है. मंत्रालय के मुताबिक पीयूसी प्रमाणपज्ञ मिलने के पहले ही रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर एसएमएस मिलने का प्रावधान किया गया है.
2 अब गाड़ी ट्रांसफर आसानी से
हमारे देश में गाड़ी खरीदना भले ही आसान हो लेकिन उसके अपने नाम करवाने यानी ट्रांसफर करवाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन अब आपको इससे जल्द ही छुटकारा मिल जाएगा. दरअसल सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन ट्रांसफर के प्रोसेस को ईजी करने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR) में संशोधन करने का प्रस्ताव दिया है. नए प्रस्ताव के अनुसार गाड़ी के मालिक व्हीकल रजिस्ट्रेशन के बाद में भी ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से किसी को भी नॉमिनी बना सकेंगे.
नहीं लगाने होंगे RTO के चक्कर
इस प्रस्ताव के बाद गाड़ी के मालिक की मृत्यु के मामले में बिना किसी परेशानी के वाहन को ट्रांसफर किया जा सकेगा.
आपको अभी की तरह परिवार के सदस्यों/नामांकित व्यक्ति को लगातार अलग अलग ऑफिस में जाने और कई तरह की जानकारी और डॉक्युमेंट जमा करने की जरूरत नहीं होगी. इसके अलावा कर्मिशयल व्हीकल के मामले में कभी-कभी वाहन परमिट रद्द भी हो जाते हैं. इससे उस वाहन का उपयोग करने की अनुमति को दोबारा हासिल करना मुश्किल हो जाता है.
आधार कार्ड से होगा वेरिफिकेशन
मोटर वाहन के नामांकित व्यक्ति को मालिक की डेथ के मामले में वाहन के कानूनी उत्तराधिकारी बनने के लिए पहचान का प्रमाण देना होगा. अगर नामित व्यक्ति पहले से ही नॉमिनी है, तो वाहन को उसके नाम पर ट्रांसफर किया जाएगा और नामांकित व्यक्ति को पोर्टल पर डेथ सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा और पोर्टल के माध्यम से उसके नाम पर रजिस्ट्रेशन के नए सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई करना होगा जो आधार कार्ड के जरिए वेरीफाई किया जाएगा.
3 वाहन की बनाये वसीयत
अब आपके बाद आपकी कार-बाइक (Car-Bike) हो या ट्रक उसके मालिकाना हक को लेकर घर में कोई झगड़ा नहीं होगा. वाहन (Vehicle) को खरीदने के साथ ही आपको उसकी वसीयत करनी होगी. वाहन रजिस्ट्रेशन ऑफिस में नॉमिनी का नाम देने के साथ ही उसकी पूरी जानकारी देनी होगी. ऊपर वाला न करे जब आप नहीं होंगे तो आपके द्वारा बनाया गया नॉमिनी आपकी कार-बाइक या ट्रक का मालिक होगा. केन्द्र सरकार (Central Government) ने इस तरह के एक प्रस्ताव पर सुझाव मांगे हैं.
अभी देश में एक जैसा नहीं वाहन ट्रांसफर का कानून- वाहन मालिक की मौत के बाद उसके वाहन को ट्रांसफर करने का मौजूदा कानून अभी देश में एक जैसा नहीं है.
जायदाद की तरह ही परिवार के दूसरे लोग वाहन पर अपना दावा करते हैं. हर राज्य में अलग-अलग कानून होने की वजह से कानूनी लड़ाई लंबी चलती है, लेकिन नए कानून के बनने के बाद से यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी.
नए कानून में ऐसे ट्रांसफर होगी कार-बाइक-
वाहन मालिक की मौत के बाद वाहन रजिस्ट्रेशन (आरसी) में जो भी नामित होगा, उसके नाम वाहन को ट्रांसफर किया जाएगा. लेकिन उससे पहले उसे वाहन मालिक की मौत के संबंध में मृत्यु प्रमाण पत्र दाखिल करना होगा. उसके बाद चंद दिनों की प्रक्रिया के बाद वाहन को ट्रांसफर कर दिया जाएगा. प्रस्ताव के अनुसार तलाक और घर-परिवार में जायदाद का बंटवारा होने के हालात में नॉमिनी को बदलने का नियम भी प्रस्ताव में है.
4 सिक्योरिटी नंबर प्लेट आवश्यक ऐसे करे आवेदन
एक दिसंबर से संभागीय परिवहन कार्यालय में बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगे वाहनों से संबंधित किसी भी तरह के काम नहीं होंगे। शासन ने सभी वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को अनिवार्य कर दिया है। वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के लिए समय सीमा तय कर दी है। समय सीमा के भीतर नंबर प्लेट नहीं लगवाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे करें आवेदन
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए वेबसाइट bookmyhsrp.com पर जाना होगा
वेबसाइट खुलने पर निजी और सार्वजनिक वाहन में से एक विकल्प चुनना होगा।
इसके बाद वाहन के पेट्रोल, डीजल, सीएनजी आदि का विकल्प खुलेगा, इसमें एक विकल्प पर क्लिक करना होगा।
इसके बाद वाहन की श्रेणी खुलेगी जैसे स्कूटर, मोटरसाइकिल, गाड़ी ऑटो, भारी वाहन में से किसी एक का चुनाव करना होगा।
फिर दूसरा विकल्प खुलेगा, जिसमें वाहन की कंपनी के बारे में जानकारी देनी होगी।
अगला क्लिक करने पर राज्य का विकल्प आएगा, इसे भरने पर डीलर्स के विकल्प दिखने लगेंगे।
डीलर का चुनाव करने के बाद वाहन संबंधी जानकारी भरनी होगी। इसमें पंजीकरण संख्या, पंजीकरण की तारीख, इंजन नंबर, चेचिस नंबर, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर के बारे में बताना होगा।
इसके बाद एक और विंडो खुलेगा, जिसमें वाहन मालिक का नाम, पता और दूसरी जानकारी भरनी होगी।
वाहन की आरसी और आईडी प्रूफ भी अपलोड करना होगा, इसके बाद ओटीपी जनरेट होगा।
फिर बुकिंग के टाइम और डेट का ऑप्शन दिखेगा लास्ट में पेमेंट की प्रक्रिया का ऑप्शन आएगा।
ऑनलाइन के अलावा संबंधित वाहन डीलर के यहां भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए आवेदन किया जा सकता है।
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने की समय सीमा
एक अप्रैल 2005 से पहले आदेश जारी होने की डेट से चार महीने के अंदर
एक अप्रैल 2005 से 31 मार्च 2010 आदेश जारी होने से छह महीने के अंदर
एक अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2015 आदेश जारी होने से आठ महीने के अंदर
एक अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2019 आदेश जारी होने से 10 महीने के अंदर
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी श्याम लाल ने बताया कि आरटीओ में वाहन से संबंधित किसी भी कार्य के लिए हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को एक दिसंबर से अनिवार्य कर दिया जाएगा।
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के लिए ऑनलाइन बुकिंग के साथ ही संबंधित डीलर के यहां आवेदन किया जा सकता है।
घर बैठे इस तरह करें ऑनलाइन आवेदन और बनवाए अपना ड्राइविंग लाइसेंस वो भी मात्र 350 में ये है पूरा प्रोसेस
भारत सरकार ने सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ड्राइविंग को लेकर बड़े सख्त नियम बना रखे हैं। इन्हीं नियमों में वाहन चलाने वाले के पास ड्राइविंग लाइसेंस का होना अनिवार्य किया गया है। वहीं, ड्राइविंग लाइसेंस ना होने पर चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कड़ा जुर्माना लगाए जाने का भी प्रावधान है। लेकिन हमारे देश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना आज भी ढेरी खीर है। क्योंकि इसमें सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। लेकिन आपको हम एक तरीका बताने जा रहे हैं जिससे आप घर बैठे में ही अपना ड्राइविंग लाइसेंस (Driving Licence) बनवा सकेंगे।
वो भी मात्र 350 रुपए में। तो आइए जानते हैं क्या है इसकी प्रक्रिया.
यहां जानें, किस तरह घर बैठे बड़े आसानी से मिल जाएगा डीएल
सरकार की इस अनोखी पहल के तहत आप अब घर बैठे ही ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आप अपने शहर के आरटीओ ऑफिस में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए सबसे पहले आपको https://parivahan.gov.in/ पर लॉग इन करना होगा। जिसके बाद आपको ड्राइविंग लाइसेंस सेक्शन पर क्लिक करना होगा। इस सेक्शन पर क्लिक करने के बाद यहां आपको अपनी पर्सनल जानकारी डालनी होगी। जिसके बाद आपको इसे समिट करना होगा।
एक ओर जहां सरकारी ऑफिस से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए दलाल आपसे मोटी रकम वसूलता है। लेकिन ऑनलाइन आवेदन करने के लिए आपको केवल 350 रुपए की फीस जमा करनी होगी। ऑनलाइन फीस जमा करने के बाद आपके मोबाइल पर 1 मैसेज आएगा। इस मैसेज में ड्राइविंग टेस्ट देने की तारीख, जगह और समय बताई जाएगी। टेस्ट देने के 15 दिन के अंदर आपका लाइसेंस आपके दिए हुए पते पर पहुंच जाएगा।
प्रार्थना:- कृपया विद्धान कानून के जानकार से अनुरोध है कि उपरोक्त उत्तर में कुछ तथ्य छूट गये हो तो कृपया कमेन्ट करके उसको पूरा व सही कर लोगो को सही जानकारी देने के लिए सहयोग करें।
नोट:- उपरोक्त तथ्य व जानकारी विभिन्न स्रोतों से ली गयी है समय व परिस्थिति के अनुसार उसमें परिवर्तन हो सकता है पाठक कृपया अपने विवेक से काम लें? यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से विशेषज्ञ की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी समस्या के लिए हमेशा सम्बन्धित विषय के विशेषज्ञ से सलाह लें।